विदेशी साइबर फ्रॉड गिरोहों के लिए भारतीयों की भर्ती करने वाला आरोपी गिरफ्तार
भारत में साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच एक महत्वपूर्ण कार्रवाई में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया है जो भारतीय नागरिकों को विदेशों में चल रहे साइबर फ्रॉड गिरोहों के लिए भर्ती कर रहा था। यह गिरोह मुख्य रूप से विदेशों में बने साइबर स्कैम कंपाउंड से भारत सहित कई देशों के लोगों को ठगने का काम करता था।
क्या है पूरा मामला
CBI को मिली जानकारी के अनुसार कुछ संगठित साइबर अपराधी गिरोहों ने विदेशी देशों, विशेष रूप से कंबोडिया में बड़े स्तर पर साइबर ठगी के केंद्र स्थापित किए हैं। इन गिरोहों का मुख्य उद्देश्य भारतीय नागरिकों को निशाना बनाकर ऑनलाइन धोखाधड़ी करना है।
इन गिरोहों द्वारा भारत के लोगों को डेटा एंट्री, कस्टमर सपोर्ट या अन्य आकर्षक नौकरियों का लालच देकर विदेश भेजा जाता था। लेकिन जब ये लोग वहां पहुंचते थे तो उन्हें जबरन साइबर फ्रॉड में शामिल होने के लिए मजबूर किया जाता था।
नौकरी का झांसा देकर विदेश भेजे जाते थे लोग
जांच में सामने आया कि आरोपी कृष्ण कुमार लखवानी (निवासी कानपुर, उत्तर प्रदेश) भारतीय युवाओं को विदेश भेजने के लिए भर्ती करता था।
- उम्मीदवारों से लगभग 300 से 400 अमेरिकी डॉलर तक की राशि ली जाती थी।
- उन्हें अलग-अलग रास्तों से दिल्ली के माध्यम से कंबोडिया भेजा जाता था।
- विदेश पहुंचने के बाद उन्हें साइबर फ्रॉड कॉल सेंटर या स्कैम कंपाउंड में काम करने के लिए मजबूर किया जाता था।
विदेश में बन जाते थे “साइबर गुलाम”
इन साइबर कंपाउंड में ले जाए गए लोगों के साथ गंभीर दुर्व्यवहार किया जाता था।
- उन्हें डराया-धमकाया जाता था
- गलत तरीके से कैद करके रखा जाता था
- मारपीट और दबाव डालकर उनसे ऑनलाइन ठगी करवाई जाती थी
ऐसे लोगों को अक्सर “Cyber Slaves” (साइबर गुलाम) कहा जाता है।
आरोपी के मोबाइल से मिले महत्वपूर्ण सबूत
CBI द्वारा आरोपी को भारत पहुंचने पर ट्रैक करके हिरासत में लिया गया। जांच के दौरान उसके मोबाइल फोन की जांच की गई, जिसमें कई महत्वपूर्ण सबूत मिले:
- भर्ती के लिए उम्मीदवारों का इंटरव्यू लेते हुए वीडियो
- कई भारतीय नागरिकों के पासपोर्ट की तस्वीरें
- विदेश भेजने से जुड़ी जानकारी
इन सबूतों से यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी विदेशी साइबर फ्रॉड सिंडिकेट के साथ मिलकर काम कर रहा था।
अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध का बढ़ता नेटवर्क
जांच में यह भी सामने आया कि यह एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध सिंडिकेट है जो फर्जी नौकरी के ऑफर के जरिए युवाओं को विदेश भेजता है और उनसे ऑनलाइन ठगी करवाता है।
इन साइबर फ्रॉड ऑपरेशनों के जरिए भारत सहित कई देशों के लोगों को निशाना बनाया जाता है।
सावधान रहें – फर्जी विदेश नौकरी से बचें
इस प्रकार के मामलों से बचने के लिए लोगों को कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए:
- सोशल मीडिया या मैसेज के जरिए मिलने वाले विदेशी नौकरी के ऑफर पर तुरंत भरोसा न करें
- किसी भी एजेंट को पैसे देने से पहले उसकी पूरी जांच करें
- कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट और रजिस्ट्रेशन की पुष्टि करें
- संदेह होने पर तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल या पुलिस से संपर्क करें
CBI की इस कार्रवाई से एक बड़े साइबर अपराध नेटवर्क का खुलासा हुआ है। यह मामला इस बात की भी चेतावनी है कि फर्जी नौकरी के झांसे में आकर विदेश जाने से पहले पूरी जांच करना बेहद जरूरी है।
फिलहाल आरोपी कृष्ण कुमार लखवानी को गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की जांच जारी है।
