अहमदाबाद साइबर क्राइम का बड़ा एक्शन: कनाडाई नागरिकों को ठगने वाले अवैध कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 4 गिरफ्तार

GURU CYBER YODHA
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अहमदाबाद साइबर क्राइम का बड़ा एक्शन: कनाडाई नागरिकों को ठगने वाले अवैध कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 4 गिरफ्तार

अहमदाबाद: डिजिटल धोखाधड़ी के खिलाफ अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने शहर के चांदखेड़ा इलाके में चल रहे एक अवैध अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह खुद को कनाडा सरकार के अधिकारी बताकर कनाडाई नागरिकों के साथ लाखों की ठगी कर रहा था।

छापेमारी और गिरफ्तारी

​अहमदाबाद पुलिस कमिश्नर जी.एस. मलिक और अन्य उच्चाधिकारियों के मार्गदर्शन में, साइबर क्राइम की टीम ने 14 मार्च 2026 की रात को चांदखेड़ा स्थित 'सोपान हाइट्स' के एक फ्लैट में छापेमारी की। पुलिस ने मौके से कॉल सेंटर चलाते हुए 4 आरोपियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।

पकड़े गए आरोपियों के नाम:

  1. कुश शैलेषभाई पटेल (चांदखेड़ा, अहमदाबाद)
  2. हर्ष सुमनभाई पटेल (घाटलोडिया, अहमदाबाद)
  3. आशु प्रवीणभाई पटेल (नारणपुरा, अहमदाबाद)
  4. सुनील कमलसिंह रावत (उस्मानपुरा, अहमदाबाद)

​पुलिस ने इन आरोपियों के पास से 6 लैपटॉप, 5 मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं, जिनकी कुल कीमत ₹1,87,200 आंकी गई है। अदालत ने इन आरोपियों को 5 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा है।

ठगी का तरीका: 'कनाडा रेवेन्यू एजेंसी' बनकर करते थे कॉल

​साइबर क्राइम की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। ये आरोपी "EYE BEAM" नाम के VOIP सॉफ्टवेयर का उपयोग करके कनाडा के नागरिकों को फोन करते थे। ठगी का पूरा खेल कुछ इस तरह चलता था:

  • झूठी पहचान: आरोपी खुद को 'कनाडा रेवेन्यू एजेंसी' (CRA) का अधिकारी बताते थे।
  • डर का माहौल: वे नागरिकों को डराते थे कि उनके नाम पर अवैध बैंक खाते खुले हैं और उनकी पहचान (Identity) चोरी हो गई है।
  • डाटा की चोरी: नागरिकों का विश्वास जीतकर वे उनका नाम, पता, पोस्टल कोड और बैंक (RBC - Royal Bank of Canada) की जानकारी हासिल कर लेते थे।
  • गिफ्ट कार्ड से वसूली: अंत में, मामले को सुलझाने के नाम पर वे पीड़ितों से विभिन्न कंपनियों के गिफ्ट कार्ड खरीदवाते थे और उनके जरिए पैसे अपने खातों में ट्रांसफर करवा लेते थे।

मास्टरमाइंड अभी भी फरार

​इस पूरे गिरोह का मुख्य सूत्रधार फाल्गुन रमेशचंद्र पटेल बताया जा रहा है। जांच में सामने आया है कि फाल्गुन इन लड़कों को ₹20,000 मासिक वेतन और इंसेंटिव देकर काम पर रखता था। फाल्गुन पटेल और उसका एक अन्य साथी शिवांग धशमाना फिलहाल पुलिस की पकड़ से बाहर हैं, जिनकी तलाश जारी है।

अपराधिक इतिहास

​गिरफ्तार आरोपियों में से हर्ष पटेल पहले भी 2025 में उदयपुर (राजस्थान) में इसी तरह के अवैध कॉल सेंटर मामले में पकड़ा जा चुका है। वहीं, सुनील रावत भी चंडीगढ़ में फाल्गुन पटेल के साथ मिलकर ऐसा ही नेटवर्क चला चुका है।

साइबर सुरक्षा के लिए चेतावनी

​अहमदाबाद पुलिस ने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। किसी भी अनजान कॉल पर अपनी बैंकिंग जानकारी या व्यक्तिगत विवरण साझा न करें। यदि कोई सरकारी अधिकारी बनकर आपसे 'गिफ्ट कार्ड' या 'क्रिप्टो' के जरिए भुगतान मांगे, तो समझ जाएं कि वह एक फ्रॉड है।

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