अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई: फर्जी टेंडर के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश
अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे संगठित साइबर ठग गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने अहमदाबाद सिविल अस्पताल और अहमदाबाद नगर निगम (AMC) के अधिकारियों के नाम का दुरुपयोग करके एक कंपनी से लाखों रुपये की ठगी की। इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
क्या था पूरा मामला?
शिकायतकर्ता को अलग-अलग मोबाइल नंबरों से फोन किए गए और खुद को अहमदाबाद सिविल अस्पताल तथा अहमदाबाद नगर निगम (AMC) का अधिकारी बताकर विश्वास में लिया गया। इसके बाद आरोपियों ने अस्पताल के लेटरहेड, फर्जी पहचान पत्र, टेंडर फॉर्म और खरीद आदेश (Purchase Order) जैसे दस्तावेज भेजे।
आरोपियों ने शिकायतकर्ता से कहा कि उनकी कंपनी को सिविल अस्पताल में 2,000 डिस्पोजेबल बैग की आपूर्ति का ठेका दिया जाएगा। इसके लिए विभिन्न प्रमाणपत्रों और प्रक्रियाओं के नाम पर पैसे जमा करवाए गए। इनमें निम्नलिखित प्रमाणपत्र शामिल थे:
- ZED प्रमाणपत्र
- CPCP प्रमाणपत्र
- GEM पोर्टल OEM प्रमाणपत्र
- NSIC प्रमाणपत्र
इन सभी प्रक्रियाओं के बहाने शिकायतकर्ता से लगभग 9.60 लाख रुपये की ठगी की गई।
साइबर अपराधियों की कार्यप्रणाली
जांच के दौरान यह सामने आया कि मुख्य आरोपी ने पूरे षड्यंत्र की योजना बनाई थी। उसने बैंक खाते और सिम कार्ड की व्यवस्था की तथा फर्जी दस्तावेज तैयार करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का इस्तेमाल किया। इसके अलावा, सिविल अस्पताल के नाम से नकली ईमेल आईडी भी बनाई गई और गूगल मीट के माध्यम से शिकायतकर्ता से बातचीत की गई।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने शिकायतकर्ता के कार्यालय में अस्पताल के कर्मचारी के रूप में व्यक्तिगत रूप से जाकर विश्वास जीतने का प्रयास किया था।
गिरफ्तार आरोपी
अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि इन आरोपियों ने इसी प्रकार की अन्य घटनाओं को भी अंजाम दिया था।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का दुरुपयोग
इस मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अपराधियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की सहायता से सरकारी दस्तावेजों, पहचान पत्रों और अन्य प्रमाणपत्रों को वास्तविक जैसा बनाकर तैयार किया। इससे आम लोगों के लिए असली और नकली दस्तावेजों में अंतर करना और भी कठिन हो गया है।
ऐसी धोखाधड़ी से कैसे बचें?
- किसी भी सरकारी ठेके या टेंडर से संबंधित जानकारी की आधिकारिक वेबसाइट से पुष्टि करें।
- किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए दस्तावेजों पर तुरंत भरोसा न करें।
- केवल फोन कॉल या व्हाट्सऐप संदेशों के आधार पर पैसे ट्रांसफर न करें।
- सरकारी अधिकारियों की पहचान और ईमेल पते की स्वतंत्र रूप से जांच करें।
- किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
डिजिटल युग में साइबर अपराधी लगातार नई तकनीकों का उपयोग करके लोगों को निशाना बना रहे हैं। इस मामले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी संस्थानों के नाम का दुरुपयोग करके लोगों के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी की जा सकती है। इसलिए सतर्क रहना और किसी भी वित्तीय लेन-देन से पहले पूरी जांच करना अत्यंत आवश्यक है।