इंस्टाग्राम पर "ज्योतिष/गुरुमा" बनकर ठगी: सेक्सटॉर्शन और ब्लैकमेलिंग का नया जाल

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डिजिटल युग में जहां सोशल मीडिया लोगों को जोड़ने का काम कर रहा है, वहीं साइबर अपराधी इसे ठगी का नया हथियार बना रहे हैं। हाल ही में अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे ही बड़े ऑनलाइन ठगी और ब्लैकमेलिंग (Sextortion) गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस रैकेट में अपराधी इंस्टाग्राम और फेसबुक पर "ज्योतिष" या "किन्नर गुरुमा" बनकर मासूम लोगों को अपने जाल में फंसाते थे।
आइए विस्तार से समझते हैं कि यह पूरा मामला क्या है, ठग किस 'Modus Operandi' (तरीके) का इस्तेमाल करते हैं, और आप खुद को इस तरह के साइबर अपराधों से कैसे सुरक्षित रख सकते हैं।

📌 क्या है पूरा मामला?

अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक ऐसे शातिर अपराधी को गिरफ्तार किया है, जिसने सोशल मीडिया पर फर्जी आईडी बनाकर खुद को "ज्योतिष गुरुमा" घोषित कर रखा था।
यह आरोपी लोगों की निजी समस्याओं—जैसे प्रेम संबंध, शादी में आ रही अड़चनें या पारिवारिक विवाद—का समाधान करने का झूठा दावा करता था। लोगों की धार्मिक आस्था और भावनाओं का फायदा उठाकर, यह पहले उनका विश्वास जीतता था और फिर उनकी निजी जानकारी व तस्वीरें हासिल कर उन्हें ब्लैकमेल करता था।

⚠️ ठगी का तरीका (Modus Operandi)

यह साइबर क्राइम गिरोह बेहद सुनियोजित और मनोवैज्ञानिक तरीके से लोगों को फंसाता था। उनके काम करने के तरीके को चार मुख्य चरणों में समझा जा सकता है:

चरण 1: सोशल मीडिया पर मायाजाल

इंस्टाग्राम और फेसबुक पर आकर्षक फर्जी प्रोफाइल बनाना।
धार्मिक और ज्योतिष से जुड़ी पोस्ट डालकर टारगेट ऑडियंस को अपनी ओर आकर्षित करना।

चरण 2: विश्वास जीतना और समाधान का झांसा

पीड़ितों से चैट करके उनकी कमजोरियां और निजी समस्याएं जानना।
"विशेष पूजा", "वशीकरण" या "ग्रह शांति" जैसे उपाय सुझाकर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना।

चरण 3: निजी फोटो और वीडियो हासिल करना

पूजा या अनुष्ठान के बहाने पीड़ित से उनकी तस्वीरें मांगना।
व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए संपर्क करना और चालाकी से अश्लील हरकतें करने के लिए मजबूर करना।

चरण 4: ब्लैकमेलिंग (Sextortion)

उन निजी तस्वीरों और वीडियो को रिकॉर्ड कर लेना।
पीड़ित को वीडियो "वायरल" करने या परिवार को भेजने की धमकी देना और बार-बार मोटी रकम की मांग करना।

💰 कितनी हुई ठगी और कौन है आरोपी?

इस गिरोह का नेटवर्क काफी फैला हुआ था। पुलिस जांच में सामने आए आंकड़े चौंकाने वाले हैं:
  • ठगी की रकम: सिर्फ एक मामले में पीड़ित से लगभग ₹1,43,951 की ठगी की गई। पिछले 2 वर्षों में इन अकाउंट्स के जरिए करीब ₹60 लाख के ट्रांजेक्शन का खुलासा हुआ है।
  • पीड़ितों की संख्या: महज 1 महीने के भीतर आरोपियों ने 300 से ज्यादा लोगों से संपर्क किया, जिनमें से 65+ लोग सीधे तौर पर इनकी ठगी का शिकार हुए।
  • आरोपी की पहचान: मुख्य आरोपी की पहचान रजनीश गोविंदलाल भागवत (निवासी: बीकानेर, राजस्थान) के रूप में हुई है, जो बी.ए. पास है। गिरोह के अन्य सहयोगियों की तलाश अभी जारी है।

🌐 इस्तेमाल किए गए फर्जी प्लेटफॉर्म

साइबर अपराधियों ने लोगों को धोखा देने के लिए कई फर्जी अकाउंट्स का सहारा लिया। इनमें से कुछ प्रमुख नाम हैं:
Instagram: astrologer_pooja_kinnar_maa, astrotalk_with_bheravlal
Facebook: Om Mahakal Jyotishi और अन्य मिलते-जुलते पेज।

🛑 कैसे बचें इस तरह के ऑनलाइन फ्रॉड से?

साइबर अपराधियों के इस नए जाल से बचने के लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। खुद को सुरक्षित रखने के लिए इन बातों का ध्यान रखें:

✔️ हमेशा सतर्क रहें

  • सोशल मीडिया पर अचानक मिले "ज्योतिष", "गुरु" या "वशीकरण" के विज्ञापनों और दावों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें।
  • किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी निजी तस्वीरें या वीडियो बिल्कुल साझा न करें।

✔️ डिजिटल सुरक्षा के नियम अपनाएं

  • अज्ञात नंबरों से आने वाले वीडियो कॉल न उठाएं। अगर उठा भी लें, तो अजनबी के कहने पर कोई भी असुविधाजनक हरकत न करें। कैमरे पर उंगली रखकर या फ्रंट कैमरा ऑफ करके बात करने की आदत डालें।
  • अपनी संवेदनशील जानकारी (मोबाइल नंबर, OTP, बैंक डिटेल्स) किसी से साझा न करें।

✔️ तुरंत और सही कार्रवाई करें

  • यदि आप ब्लैकमेलिंग का शिकार हो गए हैं, तो घबराएं नहीं और पैसे बिल्कुल न दें। पैसे देने से ब्लैकमेलर्स की मांग कभी खत्म नहीं होती।
  • तुरंत अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन या राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) पर शिकायत दर्ज करें। आप 1930 डायल करके भी तुरंत मदद मांग सकते हैं।

अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच द्वारा किया गया यह भंडाफोड़ इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि ऑनलाइन ठग अब केवल तकनीकी खामियों का नहीं, बल्कि मानवीय भावनाओं, आस्था और निजी कमजोरियों का फायदा उठा रहे हैं। इंटरनेट की दुनिया में सतर्क रहना ही सबसे बड़ा बचाव है। यदि कोई "ऑनलाइन समाधान" या "चमत्कार" का दावा करता है, तो पहले उसकी सत्यता जांचें—वरना आप भी ऐसे गंभीर जाल में फंस सकते हैं।

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