मध्यप्रदेश में साइबर वित्तीय अपराधों में e-Zero FIR व्यवस्था का शुभारंभ, अब तुरंत दर्ज होगी FIR

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 साइबर वित्तीय अपराधों में e-Zero FIR व्यवस्था का शुभारंभ – 25 दिसंबर 2025, मध्यप्रदेश

न्याय की नई दिशा: डिजिटल युग में ई-जीरो एफआईआर (e-Zero FIR)

डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहाँ तकनीक ने जीवन को आसान बनाया है, वहीं साइबर वित्तीय धोखाधड़ी ने आम नागरिकों के लिए एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। एक अनजान कॉल, फर्जी लिंक या वीडियो कॉल के ज़रिये अपराधी पल भर में किसी की जीवनभर की कमाई हड़प लेते हैं। ऐसे मामलों में सबसे बड़ी समस्या होती है—समय की देरी और क्षेत्राधिकार (Jurisdiction)

इसी चुनौती को समझते हुए भारत सरकार के गृह मंत्रालय (MHA) ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है—
👉 ई-जीरो एफआईआर (e-Zero FIR)

यह व्यवस्था न केवल शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया को तेज करती है, बल्कि पीड़ित को तुरंत कानूनी सुरक्षा और आर्थिक राहत दिलाने में भी सहायक है।


नया कानूनी ढांचा: BNSS और डिजिटल न्याय

जुलाई 2024 से भारत में पुराने दंड कानूनों के स्थान पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) लागू की गई है। यह कानून नागरिक-केंद्रित है और इसका मूल उद्देश्य है—

“दंड नहीं, बल्कि त्वरित और प्रभावी न्याय”

🔹 BNSS की धारा 173

  • जीरो एफआईआर को कानूनी मान्यता
  • किसी भी स्थान से ऑनलाइन / इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से शिकायत
  • क्षेत्राधिकार की बाध्यता समाप्त

ई-जीरो एफआईआर (e-Zero FIR) क्या है?

ई-जीरो एफआईआर एक डिजिटल व्यवस्था है जिसके तहत ₹1 लाख या उससे अधिक की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में शिकायत को स्वतः एफआईआर में बदला जा सकता है।

🎯 इसका मुख्य उद्देश्य

  • समय की बर्बादी रोकना
  • Jurisdiction की बाधा खत्म करना
  • जांच तुरंत शुरू करना
  • धन की रिकवरी की संभावना बढ़ाना

ई-जीरो एफआईआर कैसे काम करती है? (Integrated System)

यह प्रणाली तीन राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म को जोड़ती है:

1️⃣ NCRP – National Cyber Crime Reporting Portal
2️⃣ I4C – Indian Cyber Crime Coordination Centre
3️⃣ CCTNS – Crime and Criminal Tracking Network & Systems

इन तीनों के आपसी समन्वय से ऑटोमेटिक ई-Zero FIR जनरेट होती है।

ई-जीरो एफआईआर पंजीकरण प्रक्रिया (Step-by-Step)

Step 1️⃣: शिकायत दर्ज

  • पीड़ित 1930 हेल्पलाइन या
  • cybercrime.gov.in (NCRP पोर्टल) पर शिकायत दर्ज करता है
  • ₹1 लाख से अधिक की धोखाधड़ी में डेटा सीधे भोपाल स्थित केंद्रीय साइबर पुलिस हब को भेजा जाता है

Step 2️⃣: ऑटोमैटिक ई-Zero FIR

  • CCTNS सर्वर के माध्यम से
  • शिकायत स्वतः e-Zero FIR में बदल जाती है

Step 3️⃣: तत्काल Acknowledgement

  • पीड़ित को तुरंत
    ✔ ई-Zero FIR नंबर
    ✔ डिजिटल रिकॉर्ड
    प्राप्त होता है

Step 4️⃣: राज्य साइबर पुलिस द्वारा समीक्षा

  • संबंधित State Cyber Police Station शिकायत की समीक्षा करता है
  • फिर इसे क्षेत्रीय (Jurisdiction) पुलिस स्टेशन को ट्रांसफर कर दिया जाता है

Step 5️⃣: नियमित FIR में परिवर्तन

  • शिकायतकर्ता को 3 दिनों के भीतर
  • अपने नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन जाकर
  • ई-Zero FIR को Regular FIR में कन्वर्ट कराना होता है

साइबर अपराध में “Golden Hour” क्यों ज़रूरी है?

साइबर फ्रॉड के बाद के पहले 2 घंटे को

⏱️ Golden Hour कहा जाता है

🔹 इस समय का महत्व:

  • 1930 पर तुरंत कॉल करने से
  • I4C बैंकों के साथ समन्वय कर
  • ठगी की रकम को फ्रीज़ किया जा सकता है

🔹 डिजिटल साक्ष्य सुरक्षा:

  • IP Logs
  • Transaction IDs
  • बैंक ट्रेल
    ई-Zero FIR के ज़रिये कानूनी रूप से तुरंत सुरक्षित हो जाते हैं

ई-जीरो एफआईआर के प्रमुख लाभ

✅ 1. क्षेत्राधिकार की बाधा समाप्त

  • देश में कहीं से भी शिकायत
  • थाने के चक्कर नहीं

✅ 2. पारदर्शिता

  • पीड़ित को डिजिटल FIR रिकॉर्ड
  • केस स्टेटस ऑनलाइन देखने की सुविधा

✅ 3. पैसे की रिकवरी में तेजी

  • जल्दी FIR → बैंकिंग चैनल एक्टिव
  • धन वापसी की संभावना बढ़ती है

✅ 4. डिजिटल साक्ष्य अपलोड

  • स्क्रीनशॉट
  • बैंक रसीद
  • कॉल डिटेल
    सीधे पोर्टल पर अपलोड

Process Flow (सरल भाषा में)

1930 / NCRP शिकायत →
e-Zero FIR जनरेशन →
Acknowledgement →
State Cyber Police Review →
Jurisdiction Police Transfer →
Regular FIR →
Investigation / Closure

‘साइबर सुरक्षित भारत’ की ओर एक मजबूत कदम

ई-Zero FIR प्रणाली प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के
“साइबर सुरक्षित भारत” के विज़न और
अक्टूबर 2024 के ‘मन की बात’ संदेश के अनुरूप है।

केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के निर्देशन में यह पहल पुलिस को—

  • अधिक तेज
  • अधिक तकनीकी
  • और अपराधियों से एक कदम आगे
    बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव है।

ई-जीरो एफआईआर केवल एक तकनीकी सुविधा नहीं, बल्कि
👉 न्याय की डिजिटल क्रांति है।

यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि:

  • पीड़ित अकेला न पड़े
  • समय पर कार्रवाई हो
  • और अपराधी कानून से न बच पाए

📞 याद रखें:
साइबर फ्रॉड होते ही – 1930 पर कॉल करें
क्योंकि समय ही सबसे बड़ा हथियार है।

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