डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड: एक फोन कॉल और ₹27 लाख की ठगी, अहमदाबाद साइबर क्राइम ने रोकी साजिश

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डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड: एक फोन कॉल और ₹27 लाख की ठगी, अहमदाबाद साइबर क्राइम ने रोकी साजिश

आज के डिजिटल युग में साइबर अपराधी नए-नए तरीकों से आम नागरिकों को डराकर ठगी का शिकार बना रहे हैं। इन्हीं खतरनाक तरीकों में से एक है “डिजिटल अरेस्ट”। हाल ही में अहमदाबाद में ऐसा ही एक गंभीर मामला सामने आया, जहाँ एक बुज़ुर्ग महिला को डराकर ₹27,00,000 किसी अज्ञात बैंक खाते में ट्रांसफर करवाने की कोशिश की गई, लेकिन समय रहते अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच और बैंक अधिकारियों की सतर्कता से यह फ्रॉड नाकाम कर दिया गया ।

🧠 क्या है “डिजिटल अरेस्ट”?

डिजिटल अरेस्ट कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। यह पूरी तरह साइबर ठगों की बनाई हुई फर्जी अवधारणा है। इसमें अपराधी खुद को

  • CBI
  • NIA
  • ATS
  • पुलिस अधिकारी
  • जज या कोर्ट अधिकारी

बताकर पीड़ित को वीडियो कॉल / व्हाट्सएप कॉल करते हैं और कहते हैं कि:

  • आपके आधार/मोबाइल से देश विरोधी गतिविधियाँ हुई हैं
  • मनी लॉन्ड्रिंग या आतंकवाद से जुड़ा मामला है
  • आपके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट है

और फिर डराकर कहते हैं कि “जांच/वेरिफिकेशन” के नाम पर अपने सारे पैसे एक “सेफ अकाउंट” में ट्रांसफर कर दो।

📌 अहमदाबाद का मामला – कैसे हुआ डिजिटल अरेस्ट का प्रयास?

दिनांक 23 दिसंबर 2025 को साबरमती क्षेत्र की बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा में एक बुज़ुर्ग महिला अपनी सभी फिक्स्ड डिपॉजिट तोड़कर ₹27 लाख ट्रांसफर कराने आई थीं।

बैंक स्टाफ को यह बात संदिग्ध लगी क्योंकि:

  • महिला बेहद घबराई हुई थीं
  • किसी से बात करने को तैयार नहीं थीं
  • लगातार मोबाइल पर कॉल/मैसेज आ रहे थे
  • पैसे किसे भेजने हैं, यह स्पष्ट नहीं बता पा रही थीं

बैंक अधिकारियों ने तुरंत साइबर क्राइम ब्रांच को सूचना दी ।

🚓 साइबर क्राइम ब्रांच की त्वरित कार्रवाई

सूचना मिलते ही:

  • साइबर क्राइम ब्रांच की टीम बैंक पहुँची
  • महिला से पूछताछ की
  • मोबाइल फोन चेक किया गया

जांच में सामने आया कि:

  • महिला को व्हाट्सएप कॉल पर खुद को NIA/ATS अधिकारी बताने वाला व्यक्ति धमका रहा था
  • फर्जी गिरफ्तारी, देशद्रोह और मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाया गया
  • कहा गया कि ₹27 लाख “वेरिफिकेशन” के लिए जमा करवाने होंगे

टीम ने महिला को समझाया कि: ❌ कोई भी एजेंसी फोन/व्हाट्सएप पर पैसे नहीं मांगती
❌ डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है

इस तरह महिला को डिजिटल अरेस्ट के जाल से बाहर निकालकर ₹27 लाख की ठगी रोकी गई ।

🕵️‍♂️ डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड का सामान्य तरीका (Modus Operandi)

साइबर अपराधी आमतौर पर:

  • व्हाट्सएप वीडियो कॉल करते हैं
  • फर्जी पुलिस यूनिफॉर्म, फर्जी कोर्ट, फर्जी नोटिस दिखाते हैं
  • सुप्रीम कोर्ट / ED / CBI के फर्जी लेटर भेजते हैं
  • “गोपनीय जांच” का डर दिखाते हैं
  • किसी से बात न करने की हिदायत देते हैं

⚠️ कैसे पहचानें कि कोई व्यक्ति डिजिटल अरेस्ट का शिकार है?

  • अचानक सामाजिक संपर्क तोड़ देना
  • हमेशा मोबाइल पर वीडियो कॉल चालू रहना
  • डर और घबराहट में रहना
  • बैंक से अचानक बड़ी रकम निकालना
  • परिवार से बात न करना

🏦 बैंक अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण संकेत

  • ग्राहक अचानक FD तोड़कर पैसा ट्रांसफर करना चाहे
  • ग्राहक डरा हुआ हो
  • फोन स्पीकर/वीडियो कॉल पर लगातार बात हो रही हो
    ➡️ तुरंत साइबर क्राइम को सूचना दें।

✅ नागरिकों के लिए जरूरी सावधानियां

✔️ कोई भी एजेंसी फोन पर पैसे नहीं मांगती
✔️ गिरफ्तारी हमेशा कानूनी नोटिस से होती है
✔️ डराकर पैसे मांगना = फ्रॉड
✔️ संदेह हो तो तुरंत पुलिस या साइबर क्राइम से संपर्क करें

📞 संपर्क करें

अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच
📱 मोबाइल: 6359625220
☎️ लैंडलाइन: 079-22861917

यह घटना बताती है कि सतर्कता ही सबसे बड़ा हथियार है। अगर बैंक स्टाफ और साइबर क्राइम टीम समय पर सक्रिय न होती, तो एक बुज़ुर्ग महिला जीवन भर की पूंजी खो सकती थीं।
डिजिटल अरेस्ट सिर्फ डर का खेल है – कानून नहीं

👉 सजग रहें, सुरक्षित रहें, और इस जानकारी को दूसरों तक ज़रूर पहुँचाएं।

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