गुजरात हाईकोर्ट और सूरत सेशंस कोर्ट को बम धमकी, 48 घंटे में चेन्नई से 2 आरोपी गिरफ्तार

GURU CYBER YODHA
0

Ahmedabad Cyber Crime: गुजरात हाईकोर्ट और सूरत सेशंस कोर्ट को बम धमकी, 48 घंटे में चेन्नई से 2 आरोपी गिरफ्तार

Ahmedabad Cyber Crime Branch News: गुजरात हाईकोर्ट और सूरत सेशंस कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले ई-मेल मामले में अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच और सूरत क्राइम ब्रांच ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को चेन्नई से 48 घंटे के भीतर गिरफ्तार किया । पुलिस की तकनीकी जांच और मानव सूचना तंत्र के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई गई।

क्या है पूरा मामला?

पुलिस के अनुसार, 5 सितंबर 2026 को गुजरात हाईकोर्ट के ई-मेल आईडी पर एक अज्ञात ई-मेल आईडी से दो धमकी भरे ई-मेल भेजे गए। ये ई-मेल सुबह 11:57 बजे और 11:59 बजे भेजे गए थे। इनमें गुजरात हाईकोर्ट और सूरत कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी।

मामले में अहमदाबाद साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में C.R. No. 11191067260148/2026 दर्ज किया गया। प्रेस नोट के अनुसार, मामले में भारतीय न्याय संहिता-2023 की संबंधित धाराओं और IT Act की धारा 66(C) के तहत कार्रवाई की गई।

48 घंटे में चेन्नई से गिरफ्तारी

धमकी भरे ई-मेल के बाद अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने ई-मेल से संबंधित तकनीकी डेटा, तकनीकी निगरानी और मानव सूचना तंत्र के माध्यम से जांच आगे बढ़ाई। आरोपियों ने अपनी पहचान और वास्तविक लोकेशन छिपाने के लिए कई तकनीकी सावधानियां बरती थीं, लेकिन जांच टीम ने उनका पता लगाकर दोनों को चेन्नई से 48 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार आरोपियों में महम्मद असफाक और राजेश उर्फ राज शामिल हैं। प्रेस नोट में दोनों की गिरफ्तारी और मामले में उनकी कथित भूमिका का विवरण दिया गया है।

जांच में सामने आया आरोपियों का तरीका

प्रेस नोट के अनुसार, आरोपियों ने अपनी पहचान और लोकेशन छिपाने के लिए अलग-अलग डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया। जांच में सामने आए प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:

  • अलग-अलग ई-मेल आईडी का इस्तेमाल।
  • अन्य/डमी व्यक्तियों के नाम पर पंजीकृत मोबाइल फोन और SIM कार्ड का इस्तेमाल करने का प्रयास।
  • अलग-अलग Wi-Fi नेटवर्क से ई-मेल भेजना।
  • Proxy अथवा अन्य तकनीकी माध्यमों से IP Address और लोकेशन छिपाने का प्रयास।
  • चलती ट्रेन में ई-मेल भेजने का तरीका अपनाना।
  • अलग-अलग स्थानों और नेटवर्क का इस्तेमाल कर डिजिटल ट्रेल से बचने का प्रयास।
  • डिजिटल माध्यमों के जरिए पहचान और वास्तविक लोकेशन छिपाने का प्रयास।

ई-मेल कब भेजे गए?

प्रेस नोट में दर्ज जानकारी के अनुसार, धमकी वाले दोनों ई-मेल 5 सितंबर 2026 को एक ही ई-मेल आईडी से भेजे गए थे:

क्रम तारीख और समय From
1 05 सितंबर 2026, 11:57:10 AM संबंधित ई-मेल आईडी
2 05 सितंबर 2026, 11:59 AM संबंधित ई-मेल आईडी

पुलिस के अनुसार क्या था मकसद?

जांच के अनुसार, मुख्य आरोपी की उसी दिन सूरत सेशंस कोर्ट में ट्रायल सुनवाई थी और वह उपस्थित नहीं हुआ था। प्रेस नोट में कहा गया है कि धमकी भरा ई-मेल भेजने का उद्देश्य लंबित कानूनी कार्यवाही से बचना और पुलिस तथा कोर्ट की कार्यवाही को बाधित करना था।

चेन्नई में बनाई गई योजना

प्रेस नोट के अनुसार, दोनों आरोपी पहले एक-दूसरे के संपर्क में थे और बाद में चेन्नई गए। पुलिस के मुताबिक, वहां उन्होंने अपनी पहचान और वास्तविक लोकेशन छिपाने के उद्देश्य से धमकी भरा ई-मेल भेजने की योजना बनाई।

जांच के अनुसार, मुख्य आरोपी ने मुंबई से चेन्नई की ट्रेन यात्रा के दौरान नई ई-मेल आईडी बनाई। चेन्नई पहुंचने के बाद दोनों ने अलग-अलग होटलों में ठहरकर होटल बदलते रहे और इसी दौरान धमकी भरा ई-मेल भेजा गया।

साइबर क्राइम टीम की कार्रवाई

आरोपियों द्वारा डिजिटल पहचान छिपाने के प्रयासों के बावजूद अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने तकनीकी डेटा का विश्लेषण, तकनीकी निगरानी और मानव सूचना तंत्र का उपयोग करते हुए जांच को आगे बढ़ाया। लगातार जांच के परिणामस्वरूप दोनों आरोपियों को चेन्नई में ट्रेस कर गिरफ्तार किया गया।

यह कार्रवाई बताती है कि डिजिटल माध्यम से अपनी पहचान और लोकेशन छिपाने के प्रयासों के बावजूद साइबर जांच में उपलब्ध तकनीकी और मानवीय सूचनाओं को जोड़कर संदिग्धों तक पहुंच बनाई जा सकती है।

आरोपी का पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड

प्रेस नोट में दोनों आरोपियों से संबंधित पूर्व मामलों का भी उल्लेख किया गया है। दस्तावेज के अनुसार, महम्मद असफाक के खिलाफ NDPS Act से संबंधित मामला दर्ज था, जबकि राजेश उर्फ राज के खिलाफ भी NDPS Act तथा एक अन्य पुलिस मामले का उल्लेख किया गया है।

गुजरात हाईकोर्ट और सूरत सेशंस कोर्ट को बम धमकी वाले ई-मेल भेजे जाने के मामले में अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच और सूरत क्राइम ब्रांच की संयुक्त कार्रवाई में दो आरोपियों को चेन्नई से 48 घंटे के भीतर गिरफ्तार किया गया। तकनीकी विश्लेषण, निगरानी और मानव सूचना तंत्र के समन्वय से आरोपियों की पहचान और लोकेशन का पता लगाया गया।

नोट: यह लेख उपलब्ध पुलिस प्रेस नोट में दी गई जानकारी पर आधारित है। आरोपियों के संबंध में लगाए गए आरोप न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।

Post a Comment

0 Comments
Post a Comment (0)
To Top