₹2,000 करोड़ से अधिक के अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध रैकेट का भंडाफोड़ सूरत सिटी क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई – “ऑपरेशन म्यूल हंट”

GURU CYBER YODHA
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₹2,000 करोड़ से अधिक के अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध रैकेट का भंडाफोड़ सूरत सिटी क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई – “ऑपरेशन म्यूल हंट”

भारत में बढ़ते साइबर अपराधों के खिलाफ सूरत सिटी पुलिस ने एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। सूरत सिटी क्राइम ब्रांच ने “ऑपरेशन म्यूल हंट” के तहत एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने देशभर में हजारों लोगों को ठगते हुए ₹2,000 करोड़ से अधिक की साइबर धोखाधड़ी को अंजाम दिया।

🔍 ऑपरेशन म्यूल हंट क्या है?

हाल के समय में यह सामने आया था कि कई लोग अपने बैंक खाते किराए पर देकर अनजाने या जानबूझकर अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड में शामिल हो रहे हैं। ऐसे म्यूल अकाउंट्स के जरिए ठगी की रकम को इधर-उधर घुमाया जाता है।
इसी पूरी चेन को जड़ से तोड़ने के लिए सूरत सिटी पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर “ऑपरेशन म्यूल हंट” शुरू किया गया।

👮‍♂️ सूरत क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई

क्राइम ब्रांच को पुख्ता खुफिया जानकारी मिली थी कि कंबोडिया और नेपाल से संचालित एक अंतरराष्ट्रीय साइबर गैंग सूरत में टेक्सटाइल व्यापार की आड़ में साइबर अपराध कर रहा है।
यह गैंग “सावरिया क्रिएशन” नामक फर्म के जरिए ग्लोबल टेक्सटाइल मार्केट, सूरत में सक्रिय था।

👉 11 जनवरी 2026 को
मुकेश ताराचंद स्वामी और बाबूलाल उर्फ प्रीत जगराम कालेर को वेसु क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।

📱 जांच में क्या सामने आया?

गिरफ्तार आरोपियों के पास से:

  • कई बैंक पासबुक, चेकबुक, डेबिट कार्ड
  • 4 मोबाइल फोन
  • आधार, पैन, वोटर आईडी जैसे पहचान पत्र

जब्त किए गए।

मोबाइल फोन की तकनीकी जांच में सामने आया कि:

  • मुकेश स्वामी 44 अलग-अलग बैंक खातों का संचालन कर रहा था
  • ये खाते I4C द्वारा विकसित समन्वय – NCCRP पोर्टल पर दर्ज
    6,040 साइबर फ्रॉड शिकायतों से जुड़े पाए गए

💰 ₹750 करोड़ की ठगी की पुष्टि, ₹2,000 करोड़ से अधिक की आशंका

अब तक:

  • 940 मामलों की जांच में
    ₹750 करोड़ से अधिक की साइबर ठगी की पुष्टि हो चुकी है
  • शेष मामलों की जांच जारी है
  • कुल ठगी की राशि ₹2,000 करोड़ से भी अधिक होने की संभावना है

🏢 फर्जी NGO के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग

जांच में यह भी सामने आया कि:

  • ठगी की रकम “विद्याप्रधान धर्मा फाउंडेशन” नामक NGO के खातों में जमा कराई जाती थी
  • NGO के डायरेक्टर मितेश विश्वास पाटिल और आशीष दलजीत शर्मा को भी गिरफ्तार किया गया

🚔 गिरफ्तार आरोपी

  1. मुकेशकुमार ताराचंद स्वामी (25 वर्ष) – मुख्य सरगना
  2. बाबूलाल उर्फ प्रीत जगराम कालेर (24 वर्ष) – NGO मैनेजर
  3. मितेश विश्वास पाटिल – NGO डायरेक्टर
  4. आशीष दलजीत शर्मा – NGO डायरेक्टर

🚨 वांछित आरोपी

  • दिनेश मूलचंद किलका – सूरत / राजस्थान
  • अनिलकुमार प्रजापति – राजस्थान
  • “शिब्बो” – नेपाल
  • अज्ञात व्यक्ति – कंबोडिया

⚙️ साइबर अपराध का तरीका (Modus Operandi)

  • कंबोडिया और नेपाल से संचालन
  • फर्जी NGO बनाकर 20+ बैंक खाते खोले गए
  • फर्जी APK फाइल्स के जरिए मोबाइल हैक
  • स्क्रीन मिररिंग से OTP चोरी
  • पैसे को म्यूल अकाउंट, फिनटेक कंपनियों और शेल कंपनियों के जरिए घुमाया गया
  • अंत में रकम को USDT क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेश भेजा गया
  • अब तक 83,448 USDT के ट्रांजैक्शन सामने आए

📌 कानूनी कार्रवाई

मामला दर्ज: Surat City DCB Police Station
C.R. No. 112100152600004/2026

लागू धाराएं:

  • भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023
  • आईटी एक्ट 2000 – धारा 66(D)

🔑 मुख्य निष्कर्ष

  • 44 बैंक खाते
  • 6,040 साइबर फ्रॉड शिकायतें
  • ₹750 करोड़ की ठगी की पुष्टि
  • कुल ठगी ₹2,000 करोड़ से अधिक की आशंका
  • अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क – कंबोडिया, नेपाल, चीन से जुड़े लिंक

सूरत सिटी क्राइम ब्रांच की यह कार्रवाई न केवल गुजरात बल्कि पूरे देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इस ऑपरेशन से हजारों साइबर फ्रॉड मामलों के खुलने की संभावना है और यह साफ संदेश देता है कि साइबर अपराध और म्यूल अकाउंट्स में शामिल लोगों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा

👉 सावधान रहें, सतर्क रहें और अपने बैंक खाते किसी को भी इस्तेमाल के लिए न दें।

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